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राठ-नम आंखों से दी गयी माॅ को विदाई व धूमधाम से मनाया गया दशहरा का पर्व

राठ-नम आंखों से दी गयी माॅ को विदाई व धूमधाम से मनाया गया दशहरा का पर्व

नम आंखों से दी गयी माॅ को विदाई व धूमधाम से मनाया गया दशहरा का पर्व
राठ।     शारदीय नवरात्रि पर 9 दिन चले दुर्गा महोत्सव के बाद बीती शाम मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन भक्तों ने नम आंखों से किया।
यह विसर्जन सुबह से ही प्रारंभ हो गया था और सुबह से मुहाना और कस्बा खेड़ा किया गया इसके लिए प्रशासन द्वारा नदी किनारे अलग से गड्ढे बनाए। क्योंकि नदी के पानी में विसर्जन करने से प्रदूषण फैलता है। इसलिए जो है इनके द्वारा अलग से गड्ढे खुदवा कर उसमें विसर्जन किया गया। इसी प्रकार से मुहाना में भी बेतवा नदी किनारे यह विसर्जन किया गया मां दुर्गा की प्रतिमाएं गांव-गांव लगाई गई थी।
वहीं नगर में भी इनकी संख्या लगभग 100 से अधिक थी जहां 70 फीसदी प्रथम दिन में ही विसर्जित कर दी गई वहीं रात्रि में एक जुलूस बड़े मंदिर से ऊंचा हुआ नगर के विभिन्न मार्गों से जुलूस मार्ग होते हुए गया। यह जुलूस रामलीला मैदान, रानी लक्ष्मीबाई, कोट बाजार, भटियाना, बजरिया, होते हुए कस्बा खेड़ा के लिए रवाना हुआ और वहां इन मूर्तियों का विसर्जन किया गया।
इस दौरान भक्तगण मूर्तियों के साथ नाचते गाते रहे और गुलाल भी चलाते रहे झांकियां शांतिपूर्ण तरीके से निकाली गई प्रशासन की ओर से काफी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी भारी संख्या में जहां पुलिस बल तैनात था।
वही प्रशासन की ओर से एसडीएम सुरेश कुमार,, सीओ शुभ सूचित, प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार शुक्ला, सभी एसआई व भारी संख्या में पुलिस के जवान तैनात रहे एस विसर्जन जुलूस का जगह-जगह लोगों ने स्वागत किया फल आदि वितरण किए तथा पेयजल आदि की व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराएं।
वही दशहरा का धार्मिक महत्व तो है ही लेकिन यह त्योहार आज भी बेहद प्रासंगिक है. यह पर्व बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है. आज भी कई बुराइयों के रूप में रावण जिंदा है. यह त्योहार हमें हर साल याद दिलाता है कि हम बुराई रूपी रावण का नाश करके ही जीवन को बेहतर बना सकते हैं. महंगाई, भ्रष्टाचार, व्यभिचार, बेईमानी, हिंसा, भेदभाव, ईर्ष्या-द्वेष, पर्यावरण प्रदूषण, यौन हिंसा और यौन शोषण जैसी तमाम ऐसी बुराइयां हैं जो आज भी अपना अट्टाहस कर मानवता और सभ्य समाज को चुनौती दे रही हैं. ऐसे में जरूरी है कि हम दशहरा के दिन इनको जड़ से खत्म करने का संकल्प लें. तभी हम सही मायनों में दशहरा की महत्ता को समझ पाएंगे।

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