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हमीरपुर-भारत के पहले ध्वज की पहली आरोहण नेत्री की पुण्य तिथि पर हुआ संगोष्ठी का आयोजन

हमीरपुर-भारत के पहले ध्वज की पहली आरोहण नेत्री की पुण्य तिथि पर हुआ संगोष्ठी का आयोजन

भारत के पहले ध्वज की पहली आरोहण नेत्री की पुण्य तिथि पर हुआ संगोष्ठी का आयोजन
हमीरपुर-किशनू बाबू शिवहरे महाविद्यालय सिसोलर में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत भारत के पहले ध्वज की पहली आरोहण नेत्रीःमेडम भीकाजी कामा की पुण्य तिथि(13 अगस्त)पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया,कालेज के प्राचार्य डा0 भवानीदीन ने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि भीकाजी कामा एक संपन्न परिवार में पैदा होकर भी पूरे जीवन भर राष्ट्रसेवी रही,यह अपने आप में बहुत बड़ा त्याग था,भीकाजी का जन्म 24 सितंबर 1861 को बंबई में सोराबजी फ्रेमजी पटेल के घर हुआ था,मां का नाम जैजीबाई था,इनकी प्रारंभिक शिक्षा बंबई के अलेक्जेंडर नामक एक स्कूल में हुई,उसके बाद 03 अगस्त 1885 को के0 आर0 रुस्तम कामा से भीकाजी की शादी हो गयी,मेडम कामा विवाह के बाद अधिक समय समाज और देश सेवा में लगाया,19वीं सदी के अंत में बंबई में एक भयानक महामारी के रूप में प्लेग फैल गया,जिसमें मेडम कामा ने लोगों की बहुत सेवा की,कामा स्वयं प्लेग से प्रभावित हो गयीं,परिवार वालों ने कामा को स्वास्थ्य लाभ के लिये यूरोप भेज दिया,वे  एक वर्ष रहीं,स्वस्थ होकर वे लंदन चली गयीं,लंदन में प्रमुख भारतीय राष्ट्रसेवी दादा भाई नौरोजी की डेढ़ साल सचिव रहीं,उस काल में कामा का कई प्रमुख देश भक्तों के संपर्क में आ गयीं।कामा की लाला हरदयाल,श्याम जी कृष्ण वर्मा,विनायक दामोदर सावरकर एवं सरदार सिंह राणा जैसे देश भक्तो से मुलाकात हो गयी।
श्यामजी कृष्ण वर्मा ने लंदन में इंडियन सोशियोलोजिस्ट नामक पत्र निकाला,जिसमें कामा ने एक लेखिका के रूप में काम किया,साथ ही कामा ने गोरों द्धारा किया जा रहा भारतीयों के शोषण के विरुद्ध दुनिया का ध्यान खींचा,उसके बाद लाला हरदयाल,वर्मा जी और सरदार सिंह राणा के साथ वे परिस चली गयीं,पेरिस क्रंातिकारियो का केंद्र बन चुका था,1907 में जर्मनी शहर के स्टुटगार्ड में अन्तर्राष्ट्रीय समाजवादी संमेलन हुआ,जिसमें भारत की ओर से कामा ने भारत अपने साथियों के साथ प्रतिनिधित्व किया,उस संमेलन में कामा ने अपने बैग से झंडा निकाला,उसको फहराया,लोगों से कहा कि आप सभी खड़े होकर उसका अभिवादन करें,यह उनका यह तेजस्वी व्यक्तिव्व था,सभी ने ध्वज का संमान किया,इस झंडे की डिजायन मेडम कामा,सावरकर ने तैयार की थी,झंडे में हरा,नारंगी और लाल रंग का प्रयोग किया गया था,कालान्तर में जब भारत का संविधान बना, तो मेडम से प्रेरणा लेकर भारतीय ध्वज का बनाया गया,जिसमे केसरिया,हरा और सफेद रंग का स्थान दिया गया।कामा ने स्वाधीनता प्रेमियों के लिये प्रसिद्ध नारा दिया-आगे बढ़ेा,हम भारत के लिये है और लिये है। भारत भारतीयों के लिये। मेडम द्धारा निर्मित वह राष्ट्रीय ध्वज आज भी गुजरात में भाजपा नेता राजू भाई राणा(सरदार सिंह राणा के पौत्र) के घर सुरक्षित है।
मेडम कामा को फं्रास की नागरिकता मिल गयी थी,कामा ने इंग्लैंड,रूस,मिश्र,जर्मनी और आयरलैंड में रहकर भारतीय आजादी के लिये बहुत काम किया,उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है,उन्हे आगे चल कर भारतीय कं्राति की माता कह कर पुकारा गया,कामा भारत लौट कर अन्त में बंबई आयीं और अन्ततः 13 अगस्त 1936 को इस महान कं्राति नेत्री का निधन हो गया।संगोष्ठी में डा0 श्यामनरायन,डा0 लालता प्रसाद,अनवर खान,प्रदीप यादव,राकेश,प्रत्यूष त्रिपाठी,अखिलेश सानी,राम प्रसाद,आरती गुप्ता,राजकिशोर पाल ने अपने विचार रखे। संचालन रमाकांत पाल ने किया।

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